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वाल्मीकि रामायण 3.37

विमलग्रहनक्षत्रा शारदी द्यौरिवेन्दुना ।
तं पश्यमानो नृपति स्तुतोओष प्रियमात्मजम् ॥२-३-३७॥

पूरा अध्याय