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वाल्मीकि रामायण 3.23

रामः कृतात्मा भवता शीघ्रमानीयतामिति ।
स तथेति प्रतिज्ञाय सुमन्त्रो राजशासनात् ॥२-३-२३॥

पूरा अध्याय