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वाल्मीकि रामायण 3.21

चक्रतुश्चैव यच्छेषं पार्थिवाय निवेद्य च ।
कृतमित्येव चाब्रूतामभिगम्य जगत्पतिम् ॥२-३-२१॥

पूरा अध्याय