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वाल्मीकि रामायण 29.7

पति हीना तु या नारी न सा शक्ष्यति जीवितुम् ।
कामम् एवम् विधम् राम त्वया मम विदर्शितम् ॥२-२९-७॥

पूरा अध्याय