ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 2929.5वाल्मीकि रामायण 29.5त्वया च सह गन्तव्यम् मया गुरु जन आज्ञया । त्वद् वियोगेन मे राम त्यक्तव्यम् इह जीवितम् ॥२-२९-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय