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वाल्मीकि रामायण 28.6

हित बुद्ध्या खलु वचो मया एतत् अभिधीयते ।
सदा सुखम् न जानामि दुह्खम् एव सदा वनम् ॥२-२८-६॥

पूरा अध्याय