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वाल्मीकि रामायण 27.7

ईर्ष्या रोषौ बहिष् कृत्य भुक्त शेषम् इव उदकम् ।
नय माम् वीर विश्रब्धः पापम् मयि न विद्यते ॥२-२७-७॥

पूरा अध्याय