ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 2727.5वाल्मीकि रामायण 27.5न पिता न आत्मजो न आत्मा न माता न सखी जनः । इह प्रेत्य च नारीणाम् पतिर् एको गतिः सदा ॥२-२७-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय