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वाल्मीकि रामायण 26.17

न च कान्चन चित्रम् ते पश्यामि प्रिय दर्शन ।
भद्र आसनम् पुरः कृत्य यान्तम् वीर पुरह्सरम् ॥२-२६-१७॥

पूरा अध्याय