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वाल्मीकि रामायण 25.20

महिषाः शृन्गिणो रौद्रा न ते द्रुह्यन्तु पुत्रक ।
नृ माम्स भोजना रौद्रा ये च अन्ये सत्त्व जातयः ॥२-२५-२०॥

पूरा अध्याय