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वाल्मीकि रामायण 22.8

न बुद्धि पूर्वम् न अबुद्धम् स्मरामि इह कदाचन ।
मातृणाम् वा पितुर् वाहम् कृतम् अल्पम् च विप्रियम् ॥२-२२-८॥

पूरा अध्याय