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वाल्मीकि रामायण 22.1

अथ तम् व्यथया दीनम् सविशेषम् अमर्षितम् ।
श्वसन्तम् इव नाग इन्द्रम् रोष विस्फारित ईक्षणम् ॥२-२२-१॥

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