Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 20.54

अथापि किम् जीवित मद्य मे वृथा ।
त्वया विना च्न्द्रनिभाननप्रभ ।अनुव्रजिष्यामि वनम् त्वयैव गौः ।सुदुर्बला वत्समिवानुकाङ्क्षया ॥२-२०-५४॥

पूरा अध्याय