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वाल्मीकि रामायण 20.34

उपाव्Rत्य उत्थिताम् दीनाम् वडवाम् इव वाहिताम् ।
पाम्शु गुण्ठित सर्व अग्नीम् विममर्श च पाणिना ॥२-२०-३४॥

पूरा अध्याय