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वाल्मीकि रामायण 20.19

ताम् शुक्लक्षौमसम्वीताम् व्रतयोगेन कर्शिताम् ।
तर्पयन्तीम् ददर्शाद्भिः देवताम् देववर्णिनीम् ॥२-२०-१९॥

पूरा अध्याय