Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 19.30

तम् बाष्प परिपूर्ण अक्षः प्Rष्ठतः अनुजगाम ह ।
लक्ष्मणः परम क्रुद्धः सुमित्र आनन्द वर्धनः ॥२-१९-३०॥

पूरा अध्याय