ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 1818.5वाल्मीकि रामायण 18.5इन्द्रियैः अप्रह्Rष्टैअः तम् शोक सम्ताप कर्शितम् । निह्श्वसन्तम् महा राजम् व्यथित आकुल चेतसम् ॥२-१८-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय