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वाल्मीकि रामायण 17.6

ददर्श तं राजपथं दिवि देवपथम् यथा ।
दध्यक्षतहविर्लाजैर्धूपैरगुरुचम्दनैः ॥२-१७-६॥

पूरा अध्याय