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वाल्मीकि रामायण 17.20

राज पुत्रः पितुर् वेश्म प्रविवेश श्रिया ज्वलन् ।
स कक्ष्या धन्विभिर्गुप्तास्तिस्रोऽतिक्रम्य वाजिभिः ॥२-१७-२०॥

पूरा अध्याय