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वाल्मीकि रामायण 16.44

एष श्रियम् गच्चति राघवो अद्य।
राज प्रसादात् विपुलाम् गमिष्यन् ।एते वयम् सर्व समृद्ध कामा।येषाम् अयम् नो भविता प्रशास्ता ॥२-१६-४४॥

पूरा अध्याय