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वाल्मीकि रामायण 16.1

स तत् अन्तः पुर द्वारम् समतीत्य जन आकुलम् ।
प्रविविक्ताम् ततः कक्ष्याम् आससाद पुराणवित् ॥२-१६-१॥

पूरा अध्याय