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वाल्मीकि रामायण 15.8

पद्मोत्पलयुता भान्ति पूर्णाः परमवारिणा ।
क्षौद्रं दधि घृतं लाजा दर्भाः सुमनसः पयः ॥२-१५-८॥

पूरा अध्याय