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वाल्मीकि रामायण 15.34

मणिभिर्वरमाल्यानां सुमहद्भिरलंकृतम् ।
मुक्तामणिभिराकीर्णं चन्धनागुरुभूषितम् ॥२-१५-३४॥

पूरा अध्याय