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वाल्मीकि रामायण 15.24

बुद्ध्यस्व नृपशार्दूल कुरु कार्यमनन्तरम् ।
ब्राह्मणा बलमुख्याश्च नैगमाश्चागता नृप ॥२-१५-२४॥

पूरा अध्याय