Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 15.22

आशीर्भिर्गुणयुक्ताभिरभितुष्टाव राघवम् ।
सोमसूर्यौ च काकुत्स्थ शिववैश्रवणावपि ॥२-१५-२२॥

पूरा अध्याय