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वाल्मीकि रामायण 14.54

बुद्ध्यस्व सृपशार्दूल कुरु कार्यमनन्तरम् ।
उदतिष्ठत रामस्य समग्रमभिषेचन्म् ॥२-१४-५४॥

पूरा अध्याय