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वाल्मीकि रामायण 14.26

वसिष्ठो गुणसंपन्नः शिष्येः परिवृतस्तदा ।
उपगृह्याशु संभारान् [रविवेश पुरोत्तमम् ॥२-१४-२६॥

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