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वाल्मीकि रामायण 14.19

तां तथा ब्रुवत्स्तस्य भूमिपन्य महात्मनः ।
प्रभाता शर्वरी पुण्या चन्द्रनक्षत्रश्रालिनी ॥२-१४-१९॥

पूरा अध्याय