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वाल्मीकि रामायण 14.17

त्वया सपुत्त्रया नैव कर्तव्या सलिलक्रिया ।
व्याहन्तास्यशुभाचारे यदि रामाभिषेचन्म् ॥२-१४-१७॥

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