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वाल्मीकि रामायण 14.15

प्रयाता रजनी देवि सूर्यस्योदयनं प्रति ।
अभिषेकं गुरुजन्स्त्वरयीष्यति मां ध्रुवम् ॥२-१४-१५॥

पूरा अध्याय