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वाल्मीकि रामायण 12.96

त्वम् राजपुत्रीवादेन न्यवसो मम वेश्मनि ।
अकीर्तिश्चातुला लोके ध्रुवः परिभवश्च मे ॥२-१२-९६॥

पूरा अध्याय