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वाल्मीकि रामायण 12.84

भोगकाले महत्कृच्छ्रम् पुनरेव प्रपत्स्यते ।
नालम् द्वितीयम् वचनम् पुत्रो माम् प्रति भाषितुम् ॥२-१२-८४॥

पूरा अध्याय