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वाल्मीकि रामायण 12.63

मुखवर्णम् विवर्णम् तम् यथैवेन्दुमुपप्लुतम् ।
ताम् हि मे सुकृताम् बुद्धिम् सुहृद्भिः सह निश्चिताम् ॥२-१२-६३॥

पूरा अध्याय