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वाल्मीकि रामायण 12.26

शुश्रूषाम् गौरवम् चैव प्रमाणम् वचनक्रियाम् ।
कस्ते भूयस्तरम् कुर्यादन्यत्र मनुजर्षभात् ॥२-१२-२६॥

पूरा अध्याय