वाल्मीकि रामायण 12.112
क्षुरोपमाम् नित्यमसत्प्रियम्वदाम् ।
प्रदुष्टभावाम् स्वकुलोपघातिनीम् ।न जीवितुम् त्वाम् विषहेऽमनोरमाम् ।दिधक्षमाणाम् हृदयम् सबन्धनम् ॥२-१२-११२॥
क्षुरोपमाम् नित्यमसत्प्रियम्वदाम् ।
प्रदुष्टभावाम् स्वकुलोपघातिनीम् ।न जीवितुम् त्वाम् विषहेऽमनोरमाम् ।दिधक्षमाणाम् हृदयम् सबन्धनम् ॥२-१२-११२॥