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वाल्मीकि रामायण 102.46

विगर्हमाणः कैकेयीं सहितो मन्थरामपि ।
अभिगम्य जनो रामं बाष्पपूर्णमुखो ऽभवत् ॥ २.१०२.४६॥

पूरा अध्याय