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वाल्मीकि रामायण 102.4

तथा निपतितं रामं जगत्यां जगतीपतिम् ।
कूलघातपरिश्रान्तं प्रसुप्तमिव कुञ्जरम् ॥ २.१०२.४॥

पूरा अध्याय