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वाल्मीकि रामायण 102.32

ततः पर्णकुटीद्वारमासाद्य जगतीपतिः ।
परिजग्राह बाहुभ्यामुभौ भरतलक्ष्मणौ ॥ २.१०२.३२॥

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