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वाल्मीकि रामायण 100.71

यात्रादण्डविधानञ्च द्वियोनी सन्धिविग्रहौ ।
कच्चिदेतान् महाप्राज्ञ यथावदनुमन्यसे ॥ २.१००.७१॥

पूरा अध्याय