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वाल्मीकि रामायण 100.61

कच्चिद् वृद्धांश्च बालांश्च वैद्यमुख्यांश्च राघव ।
दानेन मनसा वाचा त्रिभिरेतैर्बुभूषसे ॥ २.१००.६१॥

पूरा अध्याय