ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 100100.38वाल्मीकि रामायण 100.38कच्चिद्व्यपास्तानहितान् प्रतियातांश्च सर्वदा । दुर्बलाननवज्ञाय वर्त्तसे रिपुसूदन ॥ २.१००.३८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय