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वाल्मीकि रामायण 10.40

तत्ते व्यपनयिष्यामि नीहरमिव र्श्मिवान् ।
तथोक्ता सा समास्वस्ता वक्तुकामा तदप्रियम् ॥२-१०-४०॥

पूरा अध्याय