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वाल्मीकि रामायण 1.4

राजापि तौ महातेजाः सस्मार प्रोषितौ सुतौ ।
उभौ भरतशत्रुघ्नौ महेन्द्रवरुणोपमौ ॥२-१-४॥

पूरा अध्याय