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वाल्मीकि रामायण 1.33

गुणैर्विरुरुचे रामो दीप्तः सूर्य इवांशुभिः ।
तमेवंव्रतसंपन्नमप्रधृष्यपराक्रमम् ॥२-१-३३॥

पूरा अध्याय