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वाल्मीकि रामायण 1.18

अरोगस्तरुणो वाग्मी वपुष्मान् देशकालवित् ।
लोके पुरुषसारज्ञस्साधुरेको विनिर्मितः ॥२-१-१८॥

पूरा अध्याय