Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 1.15

सानुक्रोशो जितक्रोधो ब्राह्मणप्रतिपूजकः ।
दीनानुकम्पी धर्मज्ञो नित्यं प्रग्रहवाञ्छुचिः ॥२-१-१५॥

पूरा अध्याय