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वाल्मीकि रामायण 1.12

शीलवृद्धै र्ज्ञानवृद्धैर्वयोवृद्धैश्च सज्जनैः ।
कथयन्नास्त वैनित्य मस्त्रयोग्यान्तरेष्वपि ॥२-१-१२॥

पूरा अध्याय