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वाल्मीकि रामायण 76.3

वीर्य हीनम् इव अशक्तम् क्षत्र धर्मेण भार्गव ।
अवजानासि मे तेजः पश्य मे अद्य पराक्रमम् ॥१-७६-३॥

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