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वाल्मीकि रामायण 76.20

शरम् अप्रतिमम् राम मोक्तुम् अर्हसि सु व्रत ।
शर मोक्षे गमिष्यामि महेन्द्रम् पर्वतोत्तमम् ॥१-७६-२०॥

पूरा अध्याय