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वाल्मीकि रामायण 75.8

स त्वम् धर्म परो भूत्वा काश्यपाय वसुंधराम् ।
दत्त्वा वनम् उपागम्य महेन्द्र कृत केतनः ॥१-७५-८॥

पूरा अध्याय